मंगलवार, 1 नवंबर 2016

भरदुतिया

  • भरदुतिया
  • ************
  • द्वितीयाक आइ अद्वितीया तिथि थिक
  • भरदुतिया जे कहाबय।
  • भाइ-बहिन केर पावन-प्रेममय
  • अमिय-कलश छलकाबय।।

बहिन तोहर ई नोत लेबा मे
भ$ रहल संकोच गै।
अखनहु नारि नहि सम्मानित
विकृत समाजक सोच गै।।


बहिन-बेटी सब हो समादृत
नारी नर सँ नहि भयभीत हो।
उन्मुक्त अकाश उड़ान भेटै
जीवन सहज संगीत हो।।


आउ भाइ होइ दृढ़-संकल्पित
एहन समाज बनाबी।
नर-पैशाचिक पंजा सँ
नारि-स्वातंत्र्य बचाबी।।


हो नहि घर-बाहर शोषित-उत्पीड़ित
बहिना बहिनिक सब निर्भय हो।
होइ नारि जाग्रत् शक्ति-सम्पन्ना
ज्योति-पुंज सन, जय जय हो।।
---अशोक झा 'दुलार'
०१-११-२०१६

सोमवार, 31 अक्टूबर 2016


भरदुतिया

  1. भरदुतिया
  2. *************
  3. द्वितीया ई अद्वितीया तिथि थिक
  4. "भरदुतिया" कहाबय।
  5. भाइ-बहिन केर पावन प्रेममय
  6. अमिय-कलश छलकाबय।।
बहिन तोहर आइ नोत लेबा मे
भ$ रहल संकोच गै।
आइयो नारि नहि सम्मानित
विकृते समाजक सोच गै।।

सबहक बहिन हो समादृत
नहि नारी नर सँ भयभीत हो।
उन्मुक्त अकाश उड़ान भेटै
जीवन सहज संगीत हो।।

आउ भाइ होइ दृढ़-प्रतिज्ञ
एहन समाज बनाबी।
नर-पिशाचक पंजा सँ
नारिक स्वातंत्र्य बचाबी।।

नहि हो शोषित-उत्पीड़ित घर-बाहर
सब बहिनिक बहिना निर्भय हो।
जाग्रत नारि शक्ति-सम्पन्ना
ज्योति-पुंज सन,जय जय हो।।
--अशोक झा 'दुलार'
०१-११-२०१६

सोमवार, 7 मार्च 2016

शिव हो,हम ठकय छी तोरा

शिव हो!हम ठकय छी तोरा
तोँ पशुपति शंभु कहाबह
हम पशु-संहारक घोरा
शिव हो!हम ठकय छी तोरा।
  • ज्ञान-गंग तुअ माथ बहाबह
  • हम ज्ञानहीन अति कोरा।
  • जे जग टारल कहि भूत-बैताला
  • नेह नाथल तुअ डोरा।।
  • शिव हो••••••••••--
विश्व-कल्याण हित तोँ विषपायी
अढरन-ढरन हे भोला।
हम शोषक-उत्पीड़क जन-जन
भोकसी स्वार्थ-भांगक गोला।।
  • हमर नजरि त ऊँच अटारी
  • काँख तोहर छह झोरा।
अपना लय तोँ बनल भिखारी
  • हम छीन-झपट नहि छोरा।।
  • शिव हो••••••••••••
भाव कतहु नहि गाल बजा कय
बड़का भक्त कहाबी।
कर्म-कुकर्मक ध्यान धरी नहि
नाचि नचारी गाबी।।
शिव हो•••••••••••
  • जग परतारब काज कठिन नहि
  • हम जानी के चोरा।
  • अपन जाल मे अपने छटपट
  • मूढ़मति अति भोरा।।
  • शिव हो••••••••••
मेल एको नहि हमरा तोरा
तैयो भक्ति देखाबी।
एना कोना तोँहे कहह शिव
तोरा कोना कय पाबी।।
शिव हो! ठकबह हम की तोरा!!!

शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

सूरज दादा

  बाल-कविता

सूरज दादा तेरे दम पर
चलती दुनिया सारी है।
यह हमारी धरती माता
भी संतान तुम्हारी है।।


दया का भाव सदा ही रखना
हम पर कृपा बरसाना तुम।
लुका-छिपी बादल के संग
मेरा मन बहलाना तुम।।


कभी न इतना आग उगलना
तर पसीने से हो जाऊँ।
ना कोहरे में छुप-छुप रहना
सर्दी से ठिठुर-सा जाऊँ।।


सूरज दादा तेरे दम पर
चलती दुनिया सारी है।
रंग-बिरंगे फूल खिले हैं
उड़ती तितली प्यारी है।।


---- अशोक झा'दुलार'

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

की कहाँ अर्र-दर्र

बौआक नाम:की कहाँ अर्र-दर्र

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स्वस्ति बौआ के
मायक तरफ सँ प्रणाम
जा!!!!!!!!
आशीर्वाद।
जे सुनि मोन खुश होय।
से बाद समाचार
बौआ रौ!
कुशलो समाचार त कहल कर!
एकरा बेत्रे
मोन बेलल्ला भ जाइत अछि।
कोनादनि, आउल-बाउल।
से बौआ रौ!
अपना मे सब खुश रहू,
आनन्द करू।
मुदा बौआ रौ!
कतबो अकान-बकलेल छी,
छियौ त तैयौ हमही माय!

धरा देलक फोन सोनमा,
       आफीसर फिलाट,
बड़ीकाल भेलै खाली टुनटुनिए
तखन कहलनि समधिन
तोहर जिगेसाक मादे
"आबो छोड़ू बेटा के!
बड्ड बेटा बेटा करैत छी,बुझलौं"
से बौआ रौ!
ई छुटतै कोना!
बनाओल ने छुटितै,
जे अपने बनल छै
से टुटतै कोना?
ओ त अपने टुटियो जेबै
तैयो छुटतै कोना?
से बौआ रौ!
कहलनि समधिन;
"अहूँ त अपनओने छलियैक ककरो बेटा!"
से त सत्ते,
अपनओने छलियैन्ह तोहर पिता के
आ हुनकर सबकेर, सबकिछु केर
हर्ष केर विषाद केर सुख केर दुख केर।
से बौआ रौ !
जानि ने कियैक लगैए एना जेना
अपनाओल गेलह अछि तोँ
मात्र तोँ,
आओर तोहर क्यो नहि शायद।


से बौआ रौ !
 मोन हमर घूमि रहल अछि
   भोकाड़ि पाड़ि रहल अछि ।
    अपनाओल गेलह अछि
     तोहूँटा आखिर की नहि?
         सुदुक तोहर पदबी-प्रतीष्ठा
              आ पाइए टा त नहि?
काटै छथुन्ह अहुरिया बाप
जा जा क ओहि खेतक आड़ि पर
जे बिका गेल अछि
तोहर पढ़ाइक सुइद-मूर तरे;
आ काटै छी अहुरिया हम
सुन्न सन आँगन मे;
बेटा-पुतहु पोता-पोतीक ओलो सन बोल लेल।
देखि-देखि हमरा सबके
लोकसब हँसैत अछि
कि कनैत अछि से पता नहि।
ढेर रासे फोटो मात्र
तोरा सबहक देखैत छी
अपनेटा••••खाली •••••


   छोटकू पढ़ैए
 बड्ड चन्सगर छै
 लोक सब कहैए,
 कोंढ़ हमर दलकैए।
कहाँदनि तोरो स छै चन्सगर
 कोंढ़ कपैए हमर थर थर थर।


    हे लैह! की कहाँ लिखा देलियह अर्र-दर्र।

नववर्ष शुभकामना

  नववर्ष की शुभकामना  ************** आ गया नववर्ष मस्ती छा गया / वर्ष पिछला बीत जब प्यारा  गया// काल का ये चक्र रुकता है नहीं, ज़िन्दगी का ग...