शिव हो!हम ठकय छी तोरा
तोँ पशुपति शंभु कहाबह
हम पशु-संहारक घोरा
शिव हो!हम ठकय छी तोरा।
अढरन-ढरन हे भोला।
हम शोषक-उत्पीड़क जन-जन
भोकसी स्वार्थ-भांगक गोला।।
बड़का भक्त कहाबी।
कर्म-कुकर्मक ध्यान धरी नहि
नाचि नचारी गाबी।।
शिव हो•••••••••••
तैयो भक्ति देखाबी।
एना कोना तोँहे कहह शिव
तोरा कोना कय पाबी।।
शिव हो! ठकबह हम की तोरा!!!
तोँ पशुपति शंभु कहाबह
हम पशु-संहारक घोरा
शिव हो!हम ठकय छी तोरा।
- ज्ञान-गंग तुअ माथ बहाबह
- हम ज्ञानहीन अति कोरा।
- जे जग टारल कहि भूत-बैताला
- नेह नाथल तुअ डोरा।।
- शिव हो••••••••••--
अढरन-ढरन हे भोला।
हम शोषक-उत्पीड़क जन-जन
भोकसी स्वार्थ-भांगक गोला।।
- हमर नजरि त ऊँच अटारी
- काँख तोहर छह झोरा।
अपना लय तोँ बनल भिखारी
- हम छीन-झपट नहि छोरा।।
- शिव हो••••••••••••
बड़का भक्त कहाबी।
कर्म-कुकर्मक ध्यान धरी नहि
नाचि नचारी गाबी।।
शिव हो•••••••••••
- जग परतारब काज कठिन नहि
- हम जानी के चोरा।
- अपन जाल मे अपने छटपट
- मूढ़मति अति भोरा।।
- शिव हो••••••••••
तैयो भक्ति देखाबी।
एना कोना तोँहे कहह शिव
तोरा कोना कय पाबी।।
शिव हो! ठकबह हम की तोरा!!!