सोमवार, 7 मार्च 2016

शिव हो,हम ठकय छी तोरा

शिव हो!हम ठकय छी तोरा
तोँ पशुपति शंभु कहाबह
हम पशु-संहारक घोरा
शिव हो!हम ठकय छी तोरा।
  • ज्ञान-गंग तुअ माथ बहाबह
  • हम ज्ञानहीन अति कोरा।
  • जे जग टारल कहि भूत-बैताला
  • नेह नाथल तुअ डोरा।।
  • शिव हो••••••••••--
विश्व-कल्याण हित तोँ विषपायी
अढरन-ढरन हे भोला।
हम शोषक-उत्पीड़क जन-जन
भोकसी स्वार्थ-भांगक गोला।।
  • हमर नजरि त ऊँच अटारी
  • काँख तोहर छह झोरा।
अपना लय तोँ बनल भिखारी
  • हम छीन-झपट नहि छोरा।।
  • शिव हो••••••••••••
भाव कतहु नहि गाल बजा कय
बड़का भक्त कहाबी।
कर्म-कुकर्मक ध्यान धरी नहि
नाचि नचारी गाबी।।
शिव हो•••••••••••
  • जग परतारब काज कठिन नहि
  • हम जानी के चोरा।
  • अपन जाल मे अपने छटपट
  • मूढ़मति अति भोरा।।
  • शिव हो••••••••••
मेल एको नहि हमरा तोरा
तैयो भक्ति देखाबी।
एना कोना तोँहे कहह शिव
तोरा कोना कय पाबी।।
शिव हो! ठकबह हम की तोरा!!!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नववर्ष शुभकामना

  नववर्ष की शुभकामना  ************** आ गया नववर्ष मस्ती छा गया / वर्ष पिछला बीत जब प्यारा  गया// काल का ये चक्र रुकता है नहीं, ज़िन्दगी का ग...