- भरदुतिया
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- द्वितीया ई अद्वितीया तिथि थिक
- "भरदुतिया" कहाबय।
- भाइ-बहिन केर पावन प्रेममय
- अमिय-कलश छलकाबय।।
बहिन तोहर आइ नोत लेबा मे
भ$ रहल संकोच गै।
आइयो नारि नहि सम्मानित
विकृते समाजक सोच गै।।
सबहक बहिन हो समादृत
नहि नारी नर सँ भयभीत हो।
उन्मुक्त अकाश उड़ान भेटै
जीवन सहज संगीत हो।।
आउ भाइ होइ दृढ़-प्रतिज्ञ
एहन समाज बनाबी।
नर-पिशाचक पंजा सँ
नारिक स्वातंत्र्य बचाबी।।
नहि हो शोषित-उत्पीड़ित घर-बाहर
सब बहिनिक बहिना निर्भय हो।
जाग्रत नारि शक्ति-सम्पन्ना
ज्योति-पुंज सन,जय जय हो।।
--अशोक झा 'दुलार'
०१-११-२०१६
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