मंगलवार, 1 नवंबर 2016

भरदुतिया

  • भरदुतिया
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  • द्वितीयाक आइ अद्वितीया तिथि थिक
  • भरदुतिया जे कहाबय।
  • भाइ-बहिन केर पावन-प्रेममय
  • अमिय-कलश छलकाबय।।

बहिन तोहर ई नोत लेबा मे
भ$ रहल संकोच गै।
अखनहु नारि नहि सम्मानित
विकृत समाजक सोच गै।।


बहिन-बेटी सब हो समादृत
नारी नर सँ नहि भयभीत हो।
उन्मुक्त अकाश उड़ान भेटै
जीवन सहज संगीत हो।।


आउ भाइ होइ दृढ़-संकल्पित
एहन समाज बनाबी।
नर-पैशाचिक पंजा सँ
नारि-स्वातंत्र्य बचाबी।।


हो नहि घर-बाहर शोषित-उत्पीड़ित
बहिना बहिनिक सब निर्भय हो।
होइ नारि जाग्रत् शक्ति-सम्पन्ना
ज्योति-पुंज सन, जय जय हो।।
---अशोक झा 'दुलार'
०१-११-२०१६

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