- भरदुतिया
- ************
- द्वितीयाक आइ अद्वितीया तिथि थिक
- भरदुतिया जे कहाबय।
- भाइ-बहिन केर पावन-प्रेममय
- अमिय-कलश छलकाबय।।
बहिन तोहर ई नोत लेबा मे
भ$ रहल संकोच गै।
अखनहु नारि नहि सम्मानित
विकृत समाजक सोच गै।।
बहिन-बेटी सब हो समादृत
नारी नर सँ नहि भयभीत हो।
उन्मुक्त अकाश उड़ान भेटै
जीवन सहज संगीत हो।।
आउ भाइ होइ दृढ़-संकल्पित
एहन समाज बनाबी।
नर-पैशाचिक पंजा सँ
नारि-स्वातंत्र्य बचाबी।।
हो नहि घर-बाहर शोषित-उत्पीड़ित
बहिना बहिनिक सब निर्भय हो।
होइ नारि जाग्रत् शक्ति-सम्पन्ना
ज्योति-पुंज सन, जय जय हो।।
---अशोक झा 'दुलार'
०१-११-२०१६
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें