मंगलवार, 21 नवंबर 2017

भोर के भोरुकबा

              भोर के भोरुकबा
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भोर के भोरुकबा बाबू
दिन के उजास हो
राकेश आराधन ह$ तू
फैलल परकास हो।
               
बटिया निहारत रहली
लइ के बिसबास हो
गोदिया खेलइब$ एक दिन
अइब$ हमरे पास हो।
भोर के भोरुकबा बाबू.........

मन मे उमंग अइसन
उड़ी अकास हो
बाबू तू धन्न कइल$
बनल$ सबके खास हो।
भोर के भोरुकबा बाबू.........

ताकेला जे टुक टुक टुक टुक
मंद मंद हास हो
दरद सब मेटइ हिया
मेट इ भूख प्यास हो।
भोर के भोरुकबा बाबू........

मंगलवार, 4 जुलाई 2017

भोरुकबा
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भोरुकबा-भोर
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अपनहि तक परिवार बूझय जे
अनुशासन माने मात्र निबंध।
अस्तित्व-केंन्द्र नहि चीन्हि सकय
संबंधो के बुझय अनुबंध।

अप्पन दुखड़ा कहबै कोना
जकर नौटंकी जीवन-धर्म।
रिश्ता रिस्पेक्ट समझ ने मिसियो
आहत करै कथा से मर्म।

अहंकार के फुफकार मे
ध्वस्त होइ सब अरमान।
भावक अभाव विकृत स्वभाव
जुड़य जड़ि ने,काटै मे शान।

देखि दंग छी दुनियादारी
ने त्याग कतहु ने सेवाभाव।
सबहे जाउ निखत्तर भलहि
होइ ने हमरा कोनो अभाव।

कुतरइ जड़ि आ पातहि पानि
केहन कुबुद्धि केहन ई बानि।
कहह कोना फौदायत बेख ओ
छल पोषित जे श्रम-रक्ते सानि।

अन्हरजाली केहेन आँखि पर
देखि ने पाबय सत्य-स्वरूप।
दुर्घटित घटनो नहि लउकै
बुद्धि-विवेक जनु भट्टा-सूप।

कथनी करनी बेमेल हेरि हेरि
मन मुरुझाइ भेल मलान।
विश्वासक डोरी तैयो नहि छोड़ी 
तोरे पर 'बंकू' लटकल ध्यान।

हाली हाली हुवह नमहर
खूबे सुरेबगर खूबे छरहर।
नवयुग केर नवल ताल पर
पढ़ौबह पाठ तोँही कड़गर।

स्वजन बिस्थापन करय मूढ़मति
सेहो करय बलजोर।
अपने करै कमजोर, हौ बंकू
अपने करै कमजोर।

सब दिन सबहे करिते रहल इग्नोर
हौ बंकू,करिते रहल इग्नोर।
आस-इजोर छह आब तोँही
तोँ त$ भोरुकबा-भोर,हौ बंकू
तोँ त$ भोरुकबा भोर।
--अशोक झा "दुलार"

नववर्ष शुभकामना

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