बुधवार, 1 जनवरी 2025

नववर्ष शुभकामना

  नववर्ष की शुभकामना 

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आ गया नववर्ष मस्ती छा गया /

वर्ष पिछला बीत जब प्यारा  गया//


काल का ये चक्र रुकता है नहीं,

ज़िन्दगी का गीत फिर से गा गया/

कुछ नयापन हो नए इस साल में,

यूंँ न लगना चाहिए आया गया/


ज़िन्दगी पीछे नहीं आगे पड़ी,

यूंँ जिएँ हर पल लगे कुछ पा गया/

मंगलवार, 10 दिसंबर 2024

हारा नहीं मैं

 हारा नहीं मैं

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डगमगाया  हूंँ  मगर, हारा  नहीं मैं

कर रहा संघर्ष, बेचारा  नहीं  मैं


है हमें विश्वास, अपनी मेहनत पे

जूझता हूँ देख, आवारा नहीं मैं


सख़्त ऊपर से मगर, भीतर मुलायम

चालबाजों के लिए, प्यारा नहीं मैं


जानता अच्छी तरह, औकात अपनी

आम इक इंसान हूंँ, न्यारा नहीं मैं


फ़र्क जिसकी ज़िन्दगी में, कुछ न आया

हूंँ हक़ीक़त आज का, नारा नहीं मैं


खोल आंँखें देखता हूंँ, रंग दुनिया

इसलिए तो आंँख का तारा नहीं मैं


बुद्धि के हीं साथ दिल की, बात सुनता

आत्मा को भी कभी, मारा नहीं मैं


जो सफलता साथ मिल,हासिल किया हो

वो कभी भी श्रेय लूँ, सारा नहीं मैं

रविवार, 27 जनवरी 2019

   गण पर तंत्र भेल भारी अछि
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बढ़ले जाइत लाचारी अछि
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

जनतंत्र केर बजाबय डंका
जे वोटक बनल व्यापारी अछि।
जन-गण मन केर काज करत की
ओ तऽ भेल गगन-विहारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।

काटौ काहि किसान-मजूर बरु
धन लूटिक-लटबा सरकारी अछि।
जाउ जहन्नुम गाम-शहर सब
देश कतिआओल गोरथारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

फँसाओल समाज जातिक दलदल
धर्मक अलगे क्यारी अछि।
बाजल दुंदुभी चुनाव रण-आँगन
अपन अपन तैयारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

पोटि रहल फेर सोंटै वाला
बूझि कऽ बुड़बक टारी अछि।
सेवाक ओटे मेवा भोकसब
तकरहि मारामारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

छत्तीस भेल कोना कऽ तिरसठि
चकित-छकित नर-नारी अछि।
घोड़बा-मिलान सिमान टपि टपि
करतब अद्भुत फ़नकारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

खन पिहकारी खने किलकारी
मौसम अज़ब त्यौहारी अछि।
तांत्रिक ताना-बाना बुनलक
ई इन्द्रजाल भयकारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

वशीकरण-उच्चाटन मंत्रक
नारा-नौरीक टिटकारी अछि।
वैहटा काज ओ नहि करैए
जकर जे अधिकारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

गृध्र-दृष्टि सम योजन सूझै
अपने टारी घीढारी अछि।
घटाटोप घनघोर अन्हरिया
आछन्न-गगन भेल कारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

शायद सन्निकट प्रभातक बेला
आबय वाला दुखहारी अछि।
दर्दे दबाइक करत उपाय
ताँय इहो अंगेज हितकारी अछि।
गणतंत्रे तैयो स्वीकारी अछि।।
     __अशोक झा'दुलार'



शनिवार, 19 जनवरी 2019

             बात करै छी
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थोड़-बहुत भेल ऊपर-नीचा
 चट दऽ मुक्का-लात करै छी
                      बात करै छी!
 कथा कोन आनक जखन
अपनहु पर आघात करै छी
                     बात करै छी!
के अछि अगबे दूधक धोल
बातक बाते कात करै छी
                  बात करै छी!
घृणा-क्रोधक जहलक कैदी
व्यर्थ रतिजग्गा-प्रात करै छी
                     बात करै छी!
बुझनुक बूझी बड़ अपना के
अपने अंग प्रतिघात करै छी
                     बात करै छी!
हमर हिया आबि कऽदेखियौ
कोनटे पर सँ झात करै छी
                  बात करै छी!
सब समस्या सुलझहि बाते
नहि कियै मुलकात करै छी
                    बात करै छी!
जे फुरायल अटपट कहलहुँ
लटपट बात समाप्त करै छी
                     बात करै छी!
   __अशोक झा 'दुलार'

बुधवार, 7 मार्च 2018

मधुमास बसंती

  • मधुमय ई मधुमास बसंती,             मादक मादक बहै बसात। 
  • मंजर महमह आम्र विटप, 
  • भुलकि उठल हो गात। 
  • राग-पराग पवन उड़ाबय, 
  • कोइलीक पंचम तान। 
  • सरस बसंत धरा रसवंती, 
  • प्रणय निवेदित गान। 
  • किसिम किसिम कुसुमित सुमन, 
  • वसन प्रकृतिक सतरंगी।
  • सोना सोना समस्त बाध-बोन, 
  • उड़य अबीर बहुरंगी। 
  • छल शीते सीदित बूढ़-बढ़ानुस, 
  • बुतरुक पाँखि पसारल।
  • अनकहर कहर ढाहैत शिशिर, 
  • कड़कि के दिनकर टारल। 
  • पछबा पुरवा होड़ लगाओल, 
  • मुख मुखरित होरी होरी। 
  • बीतल फागु चैताबट संग संग, 
  • रंग चलै किछु बलजोरी। 
  • शीत घाम चलय ऋतु - चक्र, 
  • बीचक किछु विराम उपाय। 
  • आबय शरद्-बसंत एना, 
  • दुख दारुण बढ़ि बनय दबाइ। 
  • कर बिनु करतब पुष्पक-धनु सँ, 
  • अनंग चलाबथि साधल वाण। 
  • नव नव रंग उमंग बढ़य, 
  • मन उन्मन भेल विह्वल प्राण। 
  • दुखहि मूल थिक सृजनशीलताक, 
  • सुख होइ क्षणिक आभासी। 
  • नहि सुख संभव दुखक बिना, 
  • दु:ख बनबैछ प्रयासी। 
  • हलसल फुलसल कलसल सृष्टि, 
  • मन रजनी के प्रात सन। 
  • थीर ने किछुओ एहि जगती मे, 
  • ई बसंता झात सन। 
  • अओता अबस्से आतप आगाँ, 
  • स्वागत हुनकहु भव्य करब। 
  • चरण चपल छन्हि ऋतुराजक, 
  • तन मन ताबे नव्य करब। 

  •       - - अशोक झा 'दुलार' 

गुरुवार, 4 जनवरी 2018

जाड़ बड़े परै छै यौ

बंकू बाबू डुग्गू बाबू

जाड़ बड़े परै छै यौ।
किट किट दाँत बजैए
हाथ पैर ठरै छै यौ।
जाड़ कसैया बड़े निर्दैया
ककरो कहाँ छोड़ै छै यौ।
बुढ़बा-बुढ़िया खोँ-खोँ ढोँ-ढोँ
बच्चो के पकड़ै छै यौ।

बड़े विकट बुर्राक यौ बंकू
अगबे आगि मिरै छै यौ।
पछबा सिहकीक तीर चलाबै
हाड़े मे गरै छै यौ।

धोन्ही-धोकड़ी मे ध'सुरुज
मनमर्जी कते करै छै यौ।
जाड़क जुआनी धधा रहल छै
बनि फूजल-ऊक फिरै छै यौ।

कुकुर बिलैया सुटकल ड'रे
क्यो ने कष्ट हरै छै यौ।
कौआ कखनो का का क'रै
फुद्दियो ने उड़ै छै यौ।

बूझल बंका बीर अहाँ सब
कियै अस्त्र छाड़ि भिड़ै छी यौ?
बुद्धिक बले लोक लड़ैये
ओढ़ने जाड़ टरै छै यौ।

बुझनुक बच्चा स्वेटर-टोपी मे
जाड़क संग लड़ै छै यौ।
मौअति मुदा हेतै एकरो
आगिक आगु डरै छै यौ।

बंकू बाबू डुग्गू बाबू
जाड़ बड़े परै छै यौ।

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

भोर के भोरुकबा

              भोर के भोरुकबा
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भोर के भोरुकबा बाबू
दिन के उजास हो
राकेश आराधन ह$ तू
फैलल परकास हो।
               
बटिया निहारत रहली
लइ के बिसबास हो
गोदिया खेलइब$ एक दिन
अइब$ हमरे पास हो।
भोर के भोरुकबा बाबू.........

मन मे उमंग अइसन
उड़ी अकास हो
बाबू तू धन्न कइल$
बनल$ सबके खास हो।
भोर के भोरुकबा बाबू.........

ताकेला जे टुक टुक टुक टुक
मंद मंद हास हो
दरद सब मेटइ हिया
मेट इ भूख प्यास हो।
भोर के भोरुकबा बाबू........

नववर्ष शुभकामना

  नववर्ष की शुभकामना  ************** आ गया नववर्ष मस्ती छा गया / वर्ष पिछला बीत जब प्यारा  गया// काल का ये चक्र रुकता है नहीं, ज़िन्दगी का ग...