बुधवार, 7 मार्च 2018

मधुमास बसंती

  • मधुमय ई मधुमास बसंती,             मादक मादक बहै बसात। 
  • मंजर महमह आम्र विटप, 
  • भुलकि उठल हो गात। 
  • राग-पराग पवन उड़ाबय, 
  • कोइलीक पंचम तान। 
  • सरस बसंत धरा रसवंती, 
  • प्रणय निवेदित गान। 
  • किसिम किसिम कुसुमित सुमन, 
  • वसन प्रकृतिक सतरंगी।
  • सोना सोना समस्त बाध-बोन, 
  • उड़य अबीर बहुरंगी। 
  • छल शीते सीदित बूढ़-बढ़ानुस, 
  • बुतरुक पाँखि पसारल।
  • अनकहर कहर ढाहैत शिशिर, 
  • कड़कि के दिनकर टारल। 
  • पछबा पुरवा होड़ लगाओल, 
  • मुख मुखरित होरी होरी। 
  • बीतल फागु चैताबट संग संग, 
  • रंग चलै किछु बलजोरी। 
  • शीत घाम चलय ऋतु - चक्र, 
  • बीचक किछु विराम उपाय। 
  • आबय शरद्-बसंत एना, 
  • दुख दारुण बढ़ि बनय दबाइ। 
  • कर बिनु करतब पुष्पक-धनु सँ, 
  • अनंग चलाबथि साधल वाण। 
  • नव नव रंग उमंग बढ़य, 
  • मन उन्मन भेल विह्वल प्राण। 
  • दुखहि मूल थिक सृजनशीलताक, 
  • सुख होइ क्षणिक आभासी। 
  • नहि सुख संभव दुखक बिना, 
  • दु:ख बनबैछ प्रयासी। 
  • हलसल फुलसल कलसल सृष्टि, 
  • मन रजनी के प्रात सन। 
  • थीर ने किछुओ एहि जगती मे, 
  • ई बसंता झात सन। 
  • अओता अबस्से आतप आगाँ, 
  • स्वागत हुनकहु भव्य करब। 
  • चरण चपल छन्हि ऋतुराजक, 
  • तन मन ताबे नव्य करब। 

  •       - - अशोक झा 'दुलार' 

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