गुरुवार, 4 जनवरी 2018

जाड़ बड़े परै छै यौ

बंकू बाबू डुग्गू बाबू

जाड़ बड़े परै छै यौ।
किट किट दाँत बजैए
हाथ पैर ठरै छै यौ।
जाड़ कसैया बड़े निर्दैया
ककरो कहाँ छोड़ै छै यौ।
बुढ़बा-बुढ़िया खोँ-खोँ ढोँ-ढोँ
बच्चो के पकड़ै छै यौ।

बड़े विकट बुर्राक यौ बंकू
अगबे आगि मिरै छै यौ।
पछबा सिहकीक तीर चलाबै
हाड़े मे गरै छै यौ।

धोन्ही-धोकड़ी मे ध'सुरुज
मनमर्जी कते करै छै यौ।
जाड़क जुआनी धधा रहल छै
बनि फूजल-ऊक फिरै छै यौ।

कुकुर बिलैया सुटकल ड'रे
क्यो ने कष्ट हरै छै यौ।
कौआ कखनो का का क'रै
फुद्दियो ने उड़ै छै यौ।

बूझल बंका बीर अहाँ सब
कियै अस्त्र छाड़ि भिड़ै छी यौ?
बुद्धिक बले लोक लड़ैये
ओढ़ने जाड़ टरै छै यौ।

बुझनुक बच्चा स्वेटर-टोपी मे
जाड़क संग लड़ै छै यौ।
मौअति मुदा हेतै एकरो
आगिक आगु डरै छै यौ।

बंकू बाबू डुग्गू बाबू
जाड़ बड़े परै छै यौ।

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