रविवार, 27 जनवरी 2019

   गण पर तंत्र भेल भारी अछि
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बढ़ले जाइत लाचारी अछि
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

जनतंत्र केर बजाबय डंका
जे वोटक बनल व्यापारी अछि।
जन-गण मन केर काज करत की
ओ तऽ भेल गगन-विहारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।

काटौ काहि किसान-मजूर बरु
धन लूटिक-लटबा सरकारी अछि।
जाउ जहन्नुम गाम-शहर सब
देश कतिआओल गोरथारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

फँसाओल समाज जातिक दलदल
धर्मक अलगे क्यारी अछि।
बाजल दुंदुभी चुनाव रण-आँगन
अपन अपन तैयारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

पोटि रहल फेर सोंटै वाला
बूझि कऽ बुड़बक टारी अछि।
सेवाक ओटे मेवा भोकसब
तकरहि मारामारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

छत्तीस भेल कोना कऽ तिरसठि
चकित-छकित नर-नारी अछि।
घोड़बा-मिलान सिमान टपि टपि
करतब अद्भुत फ़नकारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

खन पिहकारी खने किलकारी
मौसम अज़ब त्यौहारी अछि।
तांत्रिक ताना-बाना बुनलक
ई इन्द्रजाल भयकारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

वशीकरण-उच्चाटन मंत्रक
नारा-नौरीक टिटकारी अछि।
वैहटा काज ओ नहि करैए
जकर जे अधिकारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

गृध्र-दृष्टि सम योजन सूझै
अपने टारी घीढारी अछि।
घटाटोप घनघोर अन्हरिया
आछन्न-गगन भेल कारी अछि।
गण पर तंत्र भेल भारी अछि।।

शायद सन्निकट प्रभातक बेला
आबय वाला दुखहारी अछि।
दर्दे दबाइक करत उपाय
ताँय इहो अंगेज हितकारी अछि।
गणतंत्रे तैयो स्वीकारी अछि।।
     __अशोक झा'दुलार'



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