बाल-कविता
सूरज दादा तेरे दम परचलती दुनिया सारी है।
यह हमारी धरती माता
भी संतान तुम्हारी है।।
दया का भाव सदा ही रखना
हम पर कृपा बरसाना तुम।
लुका-छिपी बादल के संग
मेरा मन बहलाना तुम।।
कभी न इतना आग उगलना
तर पसीने से हो जाऊँ।
ना कोहरे में छुप-छुप रहना
सर्दी से ठिठुर-सा जाऊँ।।
सूरज दादा तेरे दम पर
चलती दुनिया सारी है।
रंग-बिरंगे फूल खिले हैं
उड़ती तितली प्यारी है।।
---- अशोक झा'दुलार'
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें