संवाद
*******
वाद चलौ
विवाद चलौ
संवाद चलौ,
चलौ,चलिते रहौ
चलैत रहौ एहिना,अनवरत।
बेकछाइत रहत चीज,
की सत की असत् ।
कतबा असत् कतबा सत्।
वाद-विवाद केर मंथन सँ
निकलैत रहत,
संवाद केर अमृत-घट।
कौखन चित्त
कौखन पट,
मुदा मात्र नहि चलौ
खटपट-खटपट।
संवाद थिक प्राण -वायु
संबंध केर
जीवन-पथ केर
जीवन आ जगत केर,
सुख-शांति,समृद्धि केर,
व्यक्ति सँ व्यक्ति केर,
समुह सँ समुह केर,
व्यक्ति आ समूह केर
व्यष्टि केर
समष्टि केर
प्रकृति केर
पुरुष केर।
संवाद थिक प्राण-वायु;
वाद,विवाद पुनश्च संवाद।
चलैक चाही;चलैत रहौक,
संवाद ..........
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वाद चलौ
विवाद चलौ
संवाद चलौ,
चलौ,चलिते रहौ
चलैत रहौ एहिना,अनवरत।
बेकछाइत रहत चीज,
की सत की असत् ।
कतबा असत् कतबा सत्।
वाद-विवाद केर मंथन सँ
निकलैत रहत,
संवाद केर अमृत-घट।
कौखन चित्त
कौखन पट,
मुदा मात्र नहि चलौ
खटपट-खटपट।
संवाद थिक प्राण -वायु
संबंध केर
जीवन-पथ केर
जीवन आ जगत केर,
सुख-शांति,समृद्धि केर,
व्यक्ति सँ व्यक्ति केर,
समुह सँ समुह केर,
व्यक्ति आ समूह केर
व्यष्टि केर
समष्टि केर
प्रकृति केर
पुरुष केर।
संवाद थिक प्राण-वायु;
वाद,विवाद पुनश्च संवाद।
चलैक चाही;चलैत रहौक,
संवाद ..........
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