शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

नारी-शक्ति जगबही माते

नारी-शक्ति
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नरक नृशंसता जग नरक बनाओल,
नारी-शक्ति बनि जगही माते ।
बहुविध रूप विस्तार करैत,
शुम्भ-निशुम्भ बल हरही माते ।
शून्य-सम्वेदन महिषासुर सन जे,
दुर्गा रूपा परगटबही माते ।
काल-रात्रि कात्यायनी बनी कय,
ल'कर खप्पड़,रक्तबीज उकनबही माते।
तन-मन शोषित पीड़ित-जंघे,
भ्रूण-हनन तक की सहनीय माते ??
शूल-खड्गहस्त सिंहनी सम,
नारी-कराली बना उठबही माते ।

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